शेर व मुक्तक
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
email-ajaykpandey197494@gmail.com
गूँजती है पीर कैसी, आज शब्दों की गली में
गूँजती है पीर कैसी, आज शब्दों की गली में
गूँजती है पीर कैसी, आज शब्दों की गली में,
मौन बैठे गीत मेरे, वेदना की हर कली में।
स्वप्न सारे धूल ओढ़े, राह में सोते मिले हैं,
दीप सब उम्मीद मन के, आँधियों से ही छले हैं।
पंक्तियों के मध्य की भी, शून्यता कुछ कह रही है,
कौन आकर फिर जलाए, आस ये जो बुझ रही है।
रात ठहरी है उदासी, अश्रु हैं हर इक गली में।गूँजती है पीर कैसी, आज शब्दों की गली में।
दर्द ने जब गीत गाया, पंक्तियों में रक्त रोया,
भाव की निर्झर धरा ने, मौन का आकाश बोया।
कौन समझे मन यहाँ अब, कौन पढ़ पाए व्यथा को,
कौन समझेगा यहाँ अब, धूल खाती इस कथा को।
भीड़ होकर भी खड़े हैं, लोग अपनी ही गली में।गूँजती है पीर कैसी, आज शब्दों की गली में।
थाम मन विश्वास फिर भी, सत्य दीपक ले चला है,
चल रहा है राह अपनी, आँधियों ने पर छला है।
एक दिन मुस्कान फिर भी, फूल बनकर खिल उठेगी,
रोकते हैं आज जिसको, कल कहानी फिर कहेगी।
भोर उतरेगी स्वयं ही, रात की अंतिम गली में, गूँजते हों पीर चाहे , आज शब्दों की गली में।
✍️अजय कुमार पाण्डेय
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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शायरी
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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अजनबी- शायरी
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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मुक्तक
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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ग़ज़ल- मनाने वाला
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
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आईना हैरान रहता है
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
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अब जग गया हूँ।।
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बादल और वर्षा
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
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अब जग गया हूँ।।
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गीत — "साँझ ढले पर प्राण न माने"
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
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ग़ज़ल- कौन हमारा है
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
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मन से कभी न हारूँगा
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
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जरा देर लगेगी
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
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सत्य ही लिखती रहे
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
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मानसून
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
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अब जग गया हूँ।।
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