भाव को कैसे कहोगे

भाव को कैसे कहोगे 

मौन को आवाज देकर भाव को उद्गार देकर,
जब कहेंगे बात दिल की फिर कहो तुम क्या करोगे।
भाव को कैसे गुहोगे स्वप्न क्या कोई बुनोगे।

साधना में लीन होकर जब याद तुमको करेंगे,
रोक कर बहते नयन के आँसूओं को थाम लेंगे।
बोल जो मन के दबे हैं प्यार की भाषा कहेंगे,
नेह की पावन सरित में डूबकर हर गम सहेंगे।

दर्द सीने में छुपाकर कौन-सा अमृत चुनोगे,
गीत जो विरही सुनाए मौन रहकर क्या सुनोगे।
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​धूप जीवन की डगर पर छाँव बनकर हम ढलेंगे,
राह के हर शूल पर भी फूल बनकर ही खिलेंगे।
थामकर के हाथ हम हर जनम संग-संग चलेंगे,
दीप बनकर स्नेह की हम रात भर घुल-घुल जलेंगे।

हार कर खुद को कभी क्या जीत का सपना चुनोगे,
धड़कनों की आह सुनकर भाव का ताना बुनोगे।
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​साँझ की सिंदूर रेखा जब गगन में डूब जाए,
रात की नीली उदासी जब याद की लौ जलाए।
तारिकाएं जब गगन की आँख भर-भर मुस्कुराऐं,
बाँसुरी की तान कोई मौन का परदा हटाए।

प्रीत के अनुबंध पर क्या आज तुम पावन बनोगे,
प्यार के उपहार लेकर दीप जीवन के बुनोगे।

जब कहेंगे बात दिल की फिर कहो तुम क्या करोगे।
भाव को कैसे गुहोगे स्वप्न क्या कोई बुनोगे।

✍️अजय कुमार पाण्डेय 



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