और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की

और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की 

शब्द-शब्द गीत है, पंक्ति-पंक्ति प्रीत है,
आस-आस रीत है, साँस-साँस जीत है।
धार-धार है कथा प्रेम के स्वभाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

रंग-रंग प्यार है, ढंग-ढंग प्यार है,
अंग-अंग प्यार है, हर तरंग प्यार है।
डोर-डोर है बँधी चाह के लगाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

रूप में निखार है, गंध में बहार है,
सत्य की डगर सुगम, प्राण का शृंगार है।
रोशनी जगा गई दीप हर अभाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

पल में मधुमास है, मन में उल्लास है,
नैन-नैन प्यास है, हृदय में मिठास है।
छाँव-छाँव छवि है प्रेम की चुनाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

बूँद-बूँद नेह है, मौन-मौन गेह है।
राह-राह स्नेह है, चाह-चाह देह है।।
लहर-लहर उठ रही प्रीत के बहाव की।
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।।

राह में खिले सुमन, महकती हुई पवन,
साधना हुई सफल, शांत हो गई तपन।
मिट गई व्यथा सभी आज हर तनाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

भाव को दिशा मिली, स्वयं की खबर मिली,
शून्य में भटक रहे, पंथ को डगर मिली।
दौड़ अब थमी यहाँ मन-सहित सुनाव की,
और बात क्या कहूँ आपके प्रभाव की।

✍️अजय कुमार पाण्डेय 
   


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