मेरी मृदु मुस्कान तुम्हीं से
मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से।
जीवन के मरुधर को तुमने वासंती मधुमास बनाया
सपनों के हर किंचित पल में साँसों का अहसास सजाया
सूने मन आँगन में प्रतिपल आशाओं के दीप जलाए,
मेरी हर धड़कन में तुमने प्रेमिल मधुरिम गीत सुनाए।
मेरी हर अभिलाषा में तुम, मेरा हर विश्वास तुम्हीं से,
मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से।
जब जीवन की राहों में घनघोर घटाएँ छा जातीं हैं,
थककर मेरी पलकों पर जब निद्रा आकर रुक जाती हैं।
दीपक बनकर तम में प्रतिपल मुझको नव राह दिखाती हो,
टूटे हुए हृदय को फिर से है जीवन क्या समझाती हो।
मेरी हर साँसों में तुम हो, जीवन की पहचान तुम्हीं से,
मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से।
ऋतुएँ बदलीं, दिन भी बदले, या बदले जीवन रंग भले,
रूप बदलकर आये कितने ये पतझड़ मन को यहाँ छले।
मेरे सुख में खुशियाँ बनकर हर दुख में बनकर छाँव रही,
है तुमसे ही तो अर्थ मिला, है जीवन के हर भाव सभी।
मेरी है हर जीत तुम्हीं से, और हार का मान तुम्हीं से,
मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से।
कल की उन धुँधली राहों में जब स्मृतियों के पुष्प खिलेंगे,
बीते सारे मधुमासों के चाहे कितने रंग मिलेंगे।
तब भी मन के नील गगन में एक सितारा तुम ही रहना,
मेरी हर अंतिम साँसों तक अंतस में तुम यूँ ही सजना।
मेरे गीतों की सरगम तुम, मेरा मधुरिम गान तुम्हीं से,
मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से।
✍️अजय कुमार पाण्डेय
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