मोहक छवि

मदिर नयन के आलोड़न से मन मधुमास जगाती हो।
स्मृतियों को महक बनाकर इस मन को सदा लुभाती हो।
मोहक तेरी छवि ने छूकर मन को यूँ सहलाया है,
सूनी जीवन-वीणा में तुम मधुरिम राग सुनाती हो।

✍️अजय कुमार पाण्डेय 

मदिर नयन के आलोड़न से मन मधुमास उतरता है,
स्मृतियों के भोलेपन से उर का हर कोना भरता है।
मोहक तेरी छवि ने छूकर मन को यूँ सहलाया है 
सूनी जीवन-वीणा में भी प्रेमिल स्वर झंकृत करता है॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मोहक छवि

मदिर नयन के आलोड़न से मन मधुमास जगाती हो। स्मृतियों को महक बनाकर इस मन को सदा लुभाती हो। मोहक तेरी छवि ने छूकर मन को यूँ सहलाया है, सूनी जीव...