इधर झूम के गाये जिंदगी, उधर है मौत खड़ी,
सांसों की कच्ची डोरी पर, यह कैसी आन पड़ी।
इधर महकती यादें हैं, उधर मौन का डेरा है
बीच भँवर अपना जीवन, संझा है न सवेरा है।
दूर क्षितिज को आँखें तकती यादों की किसे पड़ी,
इधर झूम के गाये जिंदगी, उधर है मौत खड़ी।
खिले फूल की खुशबू कहती, पल भर का साथ यहाँ,
शीशे जैसे रिश्ते नाते , गहरा आघात यहाँ।
एक हाथ में खुशियाँ हैं, दूजे में है वीराना,
यहाँ अकेले आये सारे और अकेले जाना।
मिट्टी के इस महल में फिर भी उम्मीदों की झड़ी,
इधर झूम के गाये जिंदगी, उधर है मौत खड़ी।
वक्त की बहती धारा में, एक दिन अब बह जाना,
राजा हो या रंक यहाँ, हाथ नहीं कुछ आना।
जो कल अपना लगता था, वो बेगाना मोड़ हुआ,
अपने मन का दर्पण ही सूनेपन का तोड़ हुआ।
पलकों पर है स्वप्न सजे पर बेड़ी है पाँव पड़ी,
इधर झूम के गाये जिंदगी, उधर है मौत खड़ी।
फिर क्यूँ ना इस पल को हम सब जी भर के अपना लें,
मौत अटल है इस जीवन में फिर क्यूँ ना इसको गा लें।
जब तक सुर हैं कंठ सजे गा लो हर पल राग नया,
कल का क्या भरोसा है, जाने कब हो अंत गया।
गीतों के नर्म छाँव में यादों की है मौन लड़ी,
इधर झूम के गाये जिंदगी, उधर है मौत खड़ी।
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