वेदों की पावन श्लोकों से जिसके बोल सुहाने हैं,
रामायण की सभी पंक्तियाँ जिसके मन को भाने हैं।
गीता के श्लोकों के जैसी जिसकी बातें न्यारी हैं,
बेटी घर में जन्मे तो हर साँस लगे सुखकारी है।
उपनिषदों की ज्ञान-ज्योति सी आँखों में उजियारा है,
मंत्रों की पावन ध्वनि जैसी तुतलाता स्वर प्यारा है।
जिसके हँसने से आँगन में मंगल दीपक जलते हैं,
बेटी के नन्हे कदमों से सपने स्वयं सँवरते हैं।
वेद ग्रंथ के पुण्य कथानक उसकी छवि में बसते हैं,
देवों के आशीष सभी मृदु मुस्कानों में हँसते हैं।
जन्म-जन्म के पुण्य फलित हों बेटी जब मुस्काती है,
उसके नन्हे अधरों से तो स्वयं वंदना गाती है।
✍️अजय कुमार पाण्डेय
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