ख़याल करता हूँ

ख़याल करता हूँ

वतन को बाँटने वालों से सवाल करता हूँ,
मैं आज भी उसी भारत का ख़याल करता हूँ।

जो सच की बात करे उसकी आवाज़ दबती है,
मैं ऐसे हर सितम का भी मलाल करता हूँ।

न जात, न पंथ, न भाषा का कोई फ़र्क यहाँ,
मैं एकता की सदा ही मिसाल करता हूँ।

जो लोग डर के साए में जीने लगे हैं अब,
मैं उनके हक़ में भी खुलकर बवाल करता हूँ।

वतन रहे न टूटे यह दुआ हर दिल में रहे,
मैं इसी ख्वाब का हर दिन ख़याल करता हूँ।

 ✍️अजय कुमार पाण्डेय

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