कौन बचाये

कौन बचाये 

जनता के करवट लेने से यदि संसद ये घबरा जाये 
लोकतंत्र की मर्यादा को मिटने से फिर कौन बचाये 

नहीं जरूरी हर मुद्दों पे जनता की मंजूरी हो 
लेकिन हर चुभते मुद्दे की सत्ता क्यूँ आवाज दबाये 

एक हाथ में संविधान हो और दूजे भगवदगीता हो 
धृतराष्ट्र बनें जब राष्ट्र प्रमुख तो कुरुक्षेत्र से कौन बचाये 

दरबारी हो जाये व्यवस्था और मनो चेतना भारी हो 
ऐसी भीष्म व्यवस्था में द्युत क्रीड़ा से कौन बचाये 

सत्ता ही जब करे विभाजन और प्रलोभित राजनीति हो 
अपने घर की संतानों को फिर कुरुक्षेत्र से कौन बचाये 

✍️अजय कुमार पाण्डेय 

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