संसद आवारा हो जाता है
सड़कें सूनी हो जाएँ जब, संसद आवारा हो जाता है,
जनमन का विश्वास तभी, आँसू बनकर रो जाता है।
जनता ने सौंपे थे सपने, उम्मीदों की पोटली भर,
सत्ता के गलियारों में सच लेकिन अक्सर खो जाता है।
वाणी में आदर्श बहुत हों, कर्मों में जब शोर मचे,
लोकतंत्र का दीपक तब, अँधियारे में सो जाता है।
वोटों से जो सिंहासन है, सेवा का वह पावन धर्म,
जब स्वार्थों का दास बने, राष्ट्र हृदय भी रो जाता है।
सड़कें सूनी हो जाएँ जब, संसद आवारा हो जाता है,
जनता का हर एक भरोसा, धीरे-धीरे खो जाता है।
✍️अजय कुमार पाण्डेय
हैदराबाद
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