नारी का सम्मान

नारी का सम्मान 

दोहा
​नारी शक्ति महान है, जगत मूल आधार।
ममता की मूरत बनी, करे सकल उद्धार॥

​जहाँ नारि पूजी जाय, बसें वहाँ सुर देव।
सृष्टि अधूरी नारि बिन , तजहु सकल अहमेव॥

​चौपाई

​जननी रूप धरे सुखकारी। ममतामयी जगत महतारी॥
कबहु शक्ति बन असुर सँहारे । संकट में निज कुल को तारे॥

ये ​विद्या, बुद्धि, धैर्य की खान। वेद ग्रंथ सब करे बखान॥
घर की लक्ष्मी, वैभव सारा। नारी बिनु है जग अँधियारा॥

​कंधे से कंधा मिलि चालै। शिक्षा और प्रगति प्रतिपालै॥
आजु समय की यही पुकारा। पूज्यनीय नारी जग सारा॥

दोहा 

घर की लक्ष्मी, प्रेम की, पावन गंग समान।
नारी से परिवार है, नारी ही सम्मान॥

संस्कारों की नींव है, ममता का आधार।
नारी बिन सूना लगे, सारा घर-संसार॥

✍️अजय कुमार पाण्डेय 

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