अवध में प्राण प्रतिष्ठा

अवध में प्राण प्रतिष्ठा

कितने सपने नयनों में भर, थीं सदियाँ देख रहीं रस्ता,
छोटे-छोटे निर्णय भारी, पर अडिग रही अपनी निष्ठा।
उस निष्ठा का पुण्य फलित है, पूर्ण हुई है सभी प्रतीक्षा,
आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा, आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा।

आहुतियों से यज्ञ कुंड की, ये अग्नि नहीं बुझने पाई,
लाल हुआ सरयू का पानी, पर आस नहीं झुकने पाई।
त्याग, तपस्या और समर्पण, है ये सबके प्रण की रक्षा,
आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा, आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा।

पूर्ण हुआ वनवास राम का, ये धरती फिर से मुस्काई,
जिसको नयना तरस रहे थे, वो घड़ी सुहानी है आयी।
आज राष्ट्र का पुण्य है जगा, कण-कण में है जागी निष्ठा,
आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा, आज अवध में प्राण प्रतिष्ठा।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
       13 जनवरी, 2024

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