आसान नहीं है

आसान नहीं है

कुछ शब्दों में मन की कहना, इतना भी आसान नहीं है
चुप-चुप रह आँसू को पीना इतना भी आसान नहीं है

कितने घाव मिले हैं दिल को, औ कितने दर्द भुलाये हैं
हर पल उन घावों में जीना, इतना भी आसान नहीं है

साथ गलत का छोड़ न पाये, रिश्ता खुद ही तोड़ न पाये
खुद के मन को अब बहलाना, इतना भी आसान नहीं है

तुमसे माना दूर हुआ हूँ, पर यादों को भूल न पाया
यादों को दिल में दफनाना, इतना भी आसान नहीं है

साथ दो कदम चल न सके हम, हाथों में शायद रेख नहीं
पर किस्मत को दोषी कहना, इतना भी आसान नहीं है

बरज़ोरों की इस बस्ती में, कमजोरों की कौन सुनेगा
बरज़ोरों को दोषी कहना, इतना भी आसान नहीं है

झूठे वादे बेच रहे हैं, बस्ती-बस्ती द्वारे-द्वारे
पर वादों को झूठा कहना, इतना भी आसान नहीं है

इंसानी खालों में कितने, वहशी पथ में घूम रहे हैं
पर वहशी को वहशी कहना, इतना भी आसान नहीं है

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        14अक्टूबर, 2023

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