सूर्य किरणें गा रही हैं।

सूर्य किरणें गा रही हैं।  

बादलों की ओट से सूर्य किरणें गा रही हैं।

रात की गुमनामियों से भोर की पहली किरण
कर रही है देख अर्पित अंक में पुष्पित सुमन
चीर कर नभ घनेरे रोशनी मुस्का रही है
बादलों की ओट से सूर्य किरणें गा रही हैं।

ओस की बूँदें धरा पर रश्मियों को भा रहीं शीत के अहसास में वो सौम्य बनकर छा रहीं
भोर का पाकर निमंत्रण ओस मुस्का रही है
बादलों की ओट से सूर्य किरणें गा रही हैं।

दूर कर आलस्य सारे चेतना संचार हो
नींद से जागी सुबह पर रात का ना भार हो
छाँव आँचल के सिमट धूप भी मुस्का रही है
बादलों की ओट से सूर्य किरणें गा रही हैं।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        19मई, 2023

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