अब व्यर्थ नहीं बह जाने दो।

अब व्यर्थ नहीं बह जाने दो।  

कुछ आँसू में दर्द छुपा है, कुछ आँसू में प्रीत छुपी
कुछ आँसू में हार छिपी है, कुछ आँसू में जीत छुपी
ये आँसू हैं अनमोल बहुत, पलकों में रह जाने दो
अब व्यर्थ नहीं बह जाने दो।

कुछ यादों की बदली लाते, कुछ ले आते फरियादें
कुछ में अपनेपन के मेले, कहीं पराई आघातें
इनके भावों को मत रोको, भावों को कह जाने दो
अब व्यर्थ नहीं बह जाने दो।

मुस्कानों के बीच पला जो, दर्द यहाँ अनमोल बहुत 
पल भर में सब कह डाले ये, कौन कहे अनबोल बहुत 
आँसू अंतस का दर्पण है, अंतस को बहलाने दो
अब व्यर्थ नहीं बह जाने दो।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
       हैदराबाद
       12मई, 2023

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