वक्त की रेत पर निशाँ।

वक्त की रेत पर निशाँ।  

वक्त की रेत पर कुछ नये हैं निशाँ
कुछ है बात तेरे मेरे दरमियाँ
छोड़ कर मैं चलूँ तुम कहो किस तरह
नजर आ रहीं कैसी कहो बदलियाँ।।

आ जाओ यहाँ अब भी अहसास है
दूर हैं हम भले दिल मगर पास है
दूर से ही सही एक आवाज दो
सूने जीवन में फिर नया साज दो।।

फिर रचें गीत हम तुम नये, रीत का
भाव जिसमें हो भरा वही प्रीत का
फिर मिले हम वहीं, थीं जहाँ रश्मियाँ
वक्त की रेत पर कुछ नये हों निशाँ।।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        28फरवरी, 2022

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