भाव की अलोड़नाएँ।

भाव की अलोड़नाएँ।  

स्वप्न हैं ठहरे नयन में तुम कहो तो बोल दूँ
भाव की आलोड़नाओं को कहो तो खोल दूँ।।

लाज ने रोका अधर पर भाव जो छाये कभी
कहते कहते रुक गये शब्द कुम्हलाये सभी
दृष्टि पड़ते ही नयन के भाव सब झंकृत हुये
और भूले गीत सारे याद फिर आये सभी।।

शब्द जो ठहरे अधर पर तुम कहो तो बोल दूँ
भाव की आलोड़नाओं को कहो तो खोल दूँ।।

लिख रहे हैं गीत हम तो आस के अनुबंध के
शब्दों का लेकर सहारा बिना किसी प्रतिबंध के
कल कही जो बात तुमने यहाँ बांधे हुए है
अन्यथा मैं लिख न पाता गीत मृदु संबन्ध के।।

आस के अनुबंध को जो तुम कहो तो बोल दूँ
भाव की आलोड़नाओं को कहो तो खोल दूँ।।

एक ही जीवन मिला है तुम कहो तो वार दूँ
एक तुम्हारा साथ हो मैं सभी कुछ हार दूँ
क्या करूँगा वो जगत जिसमें तेरा साथ न हो
कामना बस है यही ये जिंदगी उपहार दूँ।।

उम्र का संबन्ध है जो तुम कहो तो बोल दूँ
भाव की आलोड़नाओं को कहो तो खोल दूँ।।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        03फरवरी, 2022

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