गीत सुना दो।

गीत सुना दो।  

शब्दों को परिमार्जित कर के
अधरों पर फिर पुष्प खिला दो
जो अंतर्मन स्पंदित कर दे
कोई ऐसा गीत सुना दो।।

स्वर की गलियों से जब गुजरूँ
कानों में प्रिय रस घुल जाये
पुलकित हों हिय भाव मनहरे
अधरों के बंधन खुल जायें
खुल जाए यादों की गलियाँ
ऐसी कोई रीत चला दो
हर अंतस स्पंदित हो जाये
कोई ऐसा गीत सुना दो।।

सुर की गलियों के तुम प्यारे
शब्दों के हो राजदुलारे
गीत रचो मन को छू जाये
मन उपवन को यूँ महका रे
बंध बंध आह्लादित जिसका
ऐसा सुर संगीत सजा दो
हर अंतस स्पंदित हो जाये
कोई ऐसा गीत सुना दो।।

हिय पुलकित आशाएँ गुंजित
भावों में जो हो प्रतिबिंबित
हृद हृद में मधुमास खिला दे
अहसासों को कर के चुंबित
मिटे तपन शीतल हो जाये
पिय भावों को आज जगा दो
हर अंतस स्पंदित हो जाये
कोई ऐसा गीत सुना दो।।

©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        18अगस्त, 2021

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