प्रणय मिलन।

प्रणय मिलन।

मधुर मधुर कुछ गा मेरे मन
प्रणय मिलन की बेला में
लाजारुण पलकों से निखरे
सौम्य समर्पित बेला में।।

रात्रि की एकांत बेला 
औऱ ये रिमझिम घटायें
बन के बरसे प्रीत ऐसे
रात्रि भी पथ भूल जाये।

भूल जाये मुग्ध हो मन
प्रणय पुंज की बेला में।
मधुर मधुर कुछ गा मेरे मन
प्रणय मिलन की बेला में।।

लाज का गहना तुम्हीं हो
प्रीत का श्रृंगार हो तुम 
तुम हृदय की पूर्णता हो
मधुमास का मनुहार तुम।

पुण्यता की पूर्णता हो
प्रेम मिलन की बेला में।
मधुर मधुर कुछ गा मेरे मन
प्रणय मिलन की बेला में।।

चाँदनी का मौन पथ तुम
पल रहा जिस पर सवेरा
भोर की शीतल किरण तुम
आस का जिस पर बसेरा।

आस का निर्माण हो फिर 
प्रणय मिलन की बेला में।
मधुर मधुर कुछ गा मेरे मन
प्रणय मिलन की बेला में।।

©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        04अप्रैल, 2021


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