कदमों के निशान।

कदमों के निशान।  

तुम चले जिस मार्ग पर
उस मार्ग पर मैं भी चला
तुम पले जिस डाल पर
उस डाल पर मैं भी पला।

पर कौन सी थी बात जो
हम दोनों में थोड़ी अलग
तुम अड़े जिस बात पर
उस बात से हरदम टला।

जब भी देखा मैने तुमको
इक व्यूह का घेरा दिखा
तुम तो रमे उस व्यूह में
पर मुश्किलों में मैं पला।

वेदनाओं के सफर में
क्यूँ चेतनाएँ मौन थी
चेतना की खोज में मैं
हरपल राह कितनी ही चला।

आज भी वीथी पर दिखेंगे
मेरे कदमों के निशान
छोड़ जिसको तुम चले
उस मार्ग मैं हरदम चला।।

✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
      हैदराबाद
      11फरवरी, 2021

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लेखक परिचय

लेखक परिचय अजय कुमार पाण्डेय 30 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जनपद में जन्मे अजय कुमार पाण्डेय वर्तमान में हैदराबाद (तेलंगाना) में...