तुमसे सब जज्बात हैं।

तुमसे सब जज्बात हैं।  

तुम इस कदर खामोश हो क्यूँ
कुछ तो कहो क्या बात है
तुमसे ही खुशियाँ हैं सारी
और तुमसे सब जज्बात हैं।।

है कौन सी वो बात जिसने
आघात तुमको है किया
वो कौन से हालात जिसने
घाव तुमको है दिया।

कुछ तो कहो ना चुप रहो अब
दिल में छुपी जो बात है।
तुमसे ही खुशियाँ हैं सारी
और तुमसे सब जज्बात हैं।।

कल चले थे हम जहाँ से
वो रास्ते अब भी वहीं हैं
और बिछड़े थे जहाँ से
वो मंजिलें अब भी वहीं हैं।

मुड़ के जो एक बार देखो
वही यादों की बारात है।
तुमसे ही खुशियाँ हैं सारी
और तुमसे सब जज्बात हैं।।

जो इंतज़ार तुमको है मेरा
इक बार दिल से बोल दो
तोड़ दो बंधन सभी औ
दिल की गिरह को खोल दो।

और क्या तुमसे कहूँ मैं
तुमसे ही दिन और रात हैं।
तुमसे ही खुशियाँ हैं सारी
और तुमसे सब जज्बात हैं।।

✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
       हैदराबाद
      21दिसंबर, 2020

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