फिर तुम कैसे पाओगे।

फिर तुम कैसे पाओगे।   

जाते हो जीवन से मेरे
जाओ पर पछताओगे
मेरे जैसा मीत वहां पर
फिर तुम कैसे पाओगे।

पाओगे खुशियां सारी
जीवन नूतन पाओगे
संबंधों की ड्योढ़ी पर
रूप नया तुम पाओगे।

पर मेरे संग जो बीते हैं
पल वो कहां भुलाओगे
मेरे जैसा मीत वहां पर
फिर तुम कैसे पाओगे।।

यूँ तो तुमने बहुत दिया है
और यहां अब रहने दो
पाया हूँ जितना भी तुमसे
उतना तो अब सहने दो।

मेरे अंतस की पीड़ा को 
समझ नहीं तुम पाओगे
मेरे जैसा मीत वहां पर
फिर तुम कैसे पाओगे।।

आने वाली किरणों का
ताप मुबारक हो तुमको
तुमने जो भी दिया मुझे
वो शाप मुबारक हो हमको।

लेन देन के इस भाषा को
समझ कभी क्या पाओगे
मेरे जैसा मीत वहां पर
फिर तुम कैसे पाओगे।।

जाते हो जीवन से मेरे
जाओ पर पछताओगे
मेरे जैसा मीत वहां पर
फिर तुम कैसे पाओगे।।

✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
       हैदराबाद
       08अक्टूबर,2020


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