सपने

           सपने              


खली हाथ आया हूँ 
कुछ सपने साथ लाया हूँ 
सपने- कुछ खट्टे, कुछ मीठे ,
कुछ अपने, कुछ पराये| 
उन्हें पूरा करना है,
खली झोली भरना है| 

सपने पूरे होंगे, है विश्वास 
हाथ खली है, पर फिर भी है आस 
राह कठिन है, मीलों चलना है 
कोई साथ दे या न दे 
फिर भी आगे बढ़ना है, क्यूंकि 
हमसफ़र मेरे साथ है | 

ये माना के काँटों पर चलना है 
कड़ी धुप में तपना है 
हंसना है, रोना है,
कुछ पाना है, कुछ खोना है 
पर चलते रहना है, क्यूंकि 
सभी सपनों को यथार्थ में बदलना है || 

अजय कुमार पाण्डेय 

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