दोहे - गुरु

दोहे - गुरु 

गुरु दीपक सम राह में, हरता मन अँधियार।
ज्ञान-किरण से शिष्य के, खुलते नूतन द्वार॥

गुरु देता है ज्ञान जो, जीवन का आधार।
सच्ची शिक्षा से मिले, जग में मान अपार॥

गुरु की वाणी में सदा, अनुभव का संसार।
जिसने उसको मानकर, पाया जीवन सार॥

गुरु दिखलाता सत्य-पथ, हरता मन का लोभ।
उसकी शिक्षा से मिटे, जीवन का हर क्षोभ॥

माटी जैसा शिष्य हो, गुरु गढ़ता आकार।
ज्ञान-कला से बन सके, जीवन का श्रृंगार॥

गुरु केवल शिक्षक नहीं, जीवन का है मीत।
उसके पावन ज्ञान से, मन में जागे प्रीत॥

धन-दौलत सब छिन सके, ज्ञान न जाए छीन।
गुरु से पाया ज्ञान ही, जीवन का है मीन॥

गुरु चरणों की धूल भी, होती अति अनमोल।
उसमें मिलते ज्ञान के, जीवन-मूल्य अमोल॥

✍️अजय कुमार पाण्डेय 
      हैदराबाद

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