गजल- निभाया न गया

निभाया न गया

दिल पे लगी उसको छुपाया न गया
मुझसे रिश्ता कोई निभाया न गया

उम्र भर दर्द के साये में जीता कैसे
चाह कर दर्द दिल में दबाया न गया

कहने को ही रिश्ता उनसे था अपना
ये भरम भी दिल में बनाया न गया

कैसे दे दूँ मैं दोष लकीरों को यहाँ
आशियाना मुझसे ही बसाया न गया

उनकी नजरों में गिर न जाऊँ फिर से
चाह कर उनको फिर से बुलाया न गया

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        03 जून, 2024

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरी मृदु मुस्कान तुम्हीं से

मेरी मृदु मुस्कान तुम्हीं से  मन के नील गगन में गुंजित भावों को अमरत्व दिलाती, मेरे पथ को सज्जित करती ऐसी मृदु मुस्कान तुम्हीं से। जीवन के म...