उम्मीद का सूरज

उम्मीद का सूरज

कई सपने हैं काँधों पर, कई आशा निराशा है।
कहीं काँधे हैं राहों में, यहाँ देता दिलासा है।
चलेंगे दूर तक हम सब, लिए सपने इन आँखों में,
सपनों के इन झुरमुट में, चमकती थोड़ी आशा है।

है खाली हाथ माना ये, मगर उम्मीद भी बाकी।
भले हों बंद एक राहें, मगर दूजी कहीं बाकी।
के ये नाक़ामियाँ भी बस, यही सन्देश देती हैं,
के हौसलों की परीक्षा है, अभी उड़ान है बाकी।

उम्मीदों का गगन अपना कभी छोटा नहीं करना।
कि मेहनत जब लिखे सपना कभी खोटा नहीं करना।
के ये उम्मीद का सूरज न डूबा है न डूबेगा,
छँटेगा ये अँधियारा मन कभी छोटा नहीं करना।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
       10 जनवरी, 2024

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