बिलखती धरती

बिलखती धरती

आज बिलखती धरती माता केशव क्यूँ कर दूर खड़ा है
शायद भारत की नियती में सत्ता का संघर्ष बड़ा है।

दूर दृष्टि का दंभ भरें क्यूँ पास हुआ जब देख न पाए
चीरहरण की कितनी घटना भूल इन्हें मन कैसे जाए
लगता शायद दरबारों में वोटों का अपकर्ष बड़ा है
शायद भारत की नियती में सत्ता का संघर्ष बड़ा है।

बिलख रही मानवता सारी देख बिलखती घर-घर नारी
दुर्योधन बन बैठे सारे हैं बने हुए सारे दरबारी
अपने घर की घटना छोटी दूजे का अपराध बड़ा है
शायद भारत की नियती में सत्ता का संघर्ष बड़ा है।

पूर्व में देखा पश्चिम देखा उत्तर देखा दक्षिण देखा
सत्ता मद में अपराधों का कदम-कदम पर रक्षण देखा
आज निहत्था कुरुक्षेत्र में अभिमन्यू फिर देख खड़ा है
शायद भारत की नियती में सत्ता का संघर्ष बड़ा है।

इन राज्यवार घटनाओं के ब्यौरे से क्या हासिल होगा
मौन रहा फिर आज समय तो अपराधों में शामिल होगा
दुखती धरती की छाती पर दुःशासन फिर आज खड़ा है
शायद भारत की नियती में सत्ता का संघर्ष बड़ा है।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        23जुलाई, 2023

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