दूर सागर पार मन के गीत गाता कौन है

दूर सागर पार मन के गीत गाता कौन है

अंजुरी में पुष्प भर कर आचमन करता हृदय
छंद की नव पंखुरी से गीत में भरता प्रणय
सुप्त होती भावनाओं को जगाता कौन है
दूर सागर पार मन के गीत गाता कौन है।

शांत सागर सम हृदय में प्रेम के संदेश सा
निर्लिप्त मन में लालसा, नेह के संकेत सा
शून्यता में कामनाओं को जगाता कौन है
दूर सागर पार मन के गीत गाता कौन है।

आरंभ है या अंत है या के अपरिमेय है
पास अपनी सी लगे ये और कभी अज्ञेय है
शून्य मन के भाव में हलचल मचाता कौन है
दूर सागर पार मन के गीत गाता कौन है।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        13जुलाई, 2023


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