मुक्तक।



यहाँ हर बार जीवन ने लिखी सबकी कहानी है।
किसी की याद में ठहरी किसी की मय जुबानी है।।
लिखे कुछ भाव जीवन ने मेरे हिस्से में ऐसे।
कि बन कर गीत कुछ छाये कुछ आंखों का पानी है।।

किसी से है नहीं शिकवा नहीं कोई शिकायत है।
जमाने की यही शायद पुरानी ही रवायत है।।
भरोसा हो जहाँ ज्यादा वहीं पर दर्द ज्यादा है।
कि कुछ तो बात है ऐसी सभी में ये अदावत है।।

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