मेरे गीत तेरे मीत।

मेरे गीत तेरे मीत। 

मेरे गीतों को अपनी
आहों का मीत बना लेना
मेरे शब्दों से मिलकर
तुम अपना गीत सजा लेना।।

तेरी गीतों में हमने
फिर कोई अपना देखा है
तेरी आँखों में हमने 
चाहत का सपना देखा है
आँचल में सपने भरकर
चाहत को मीत बना लेना
मेरे शब्दों से मिलकर
तुम अपना गीत सजा लेना।।

चाहत की महफ़िल में
मैं आया हूँ बेगाना सा
साथ नहीं भाया मेरा
तो चल दूंगा दीवाना सा
मेरे जाने से पहले
तुम अपनी जीत सजा लेना
मेरे शब्दों से मिलकर
तुम अपना गीत सजा लेना।।

नहीं करूँगा शिकवा कोई
नहीं शिकायत तुमसे होगी
महफ़िल में मायूस न होना
नहीं अदावत तुमसे होगी
पोंछ के पलकों से अश्रू
मुख पर मुस्कान सजा लेना
मेरे शब्दों से मिलकर
तुम अपना गीत सजा लेना।।

 ✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        06जुलाई, 2021

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ख़याल करता हूँ

ख़याल करता हूँ वतन को बाँटने वालों से सवाल करता हूँ, मैं आज भी उसी भारत का ख़याल करता हूँ। जो सच की बात करे उसकी आवाज़ दबती है, मैं ऐसे हर सि...