तुमको लेकिन खबर नहीं थी

तुमको लेकिन खबर नहीं थी।

अब क्या बतलाऊँ मैं तुमको
तुम  बिन  कैसे  रहती  थी
याद तुम्हें करती थी पल पल
ना  सोती  ना  जगती  थी।
तेरी  ही  बातें  करती  थी
तुमको लेकिन खबर नहीं थी।।

गीत  न  जाने  कितने  बुनती
खुद ही पढ़ती, खुद ही सुनती
कैसे  अब  बतलाऊं  तुमको
तुझमें  ही  खोई  रहती  थी।
तुझसे ही खुशियां सारी थीं
तुमको लेकिन खबर नहीं थी।।

आंखों  के  पैमाने  छलके
मोती बनकर हरपल ढलके
तेरी  ही  राहें  तकती  थीं
तुझको ही खोजा करती थीं।
देख  तुझे  मैं  जीती  थी
तुमको लेकिन खबर नहीं थी।।

✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद।   
       13जून,2020


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