सच है ये मैंने माना।

सच है ये मैंने माना    

सच है ये मैंने माना
जब सच को खुद पहचाना
जग में यदि जीना है तो
अवसादों से न घबराना।।

फूल भी हैं और कांटे भी
मेले भी हैं, सन्नाटे भी
कहीं बारिश, कहीं धूप खिली
कहीं उजाले, कहीं रातें भी।

सुख-दुःख का है ताना बाना
खुशियों को पर, घर ले आना
दुनिया में यदि जीना है तो
मुश्किल से न घबराना।।

सत पथ पर चलना संभलकर
मिलना सबसे सँभल संभलकर
पग में  शूल बिछे हैं लाखों
बिखर न जाना कहीं भटककर।

हर दिल में है प्यार जगाना
सबको है मनमीत बनाना
दुनिया में जीना है तो
मुश्किल से न घबराना।।

तू राही है उस पथ का
अंत नहीं है जिस पथ का
दीप आस का सदा जलाना
आधार बना अपने मन का।

थक कर कहीं बैठ न जाना
अपने मन को तू समझाना
दुनिया में यदि जीना है तो
मुश्किल से न घबराना।।

 ✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
          हैदराबाद
          30मई, 2020

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