होली

होली                                                              
ग्रीष्म ऋतु की आहट हुई
शीत ऋतु का अवसान
होली की आहट हुई
रंगों में डूबा हिंदुस्तान।।

मन में कोई मैल न रहे
दिलों में कोई बैर न रहे
मिलो इक दूजे संग ऐसे
खत्म हो जाये सब अभिमान।।

उम्र की रफ्तार तेज ही रही
कर्तव्यों की धार तेज हो चली
इन सबमें सामंजस्य बिठाकर
स्थापित करो नया प्रतिमान।।

रंग, अबीर, गुलालों से
भींग रहा है हर घर आंगन
प्रेम-प्यार और समर्पण से
सराबोर है सब मानव तन।।

मन में कोई भेद न रहे
दिल को कोई खेद न रहे
अंतर्मन पावन हो जाये
संशय का अवशेष न रहे।।

लगा कपाल पर रंगों का चंदन
करो आज इक दूजे का वंदन
निकलो बन मस्तों की टोली
प्यार का प्रतीक है ये होली।।

अजय कुमार पाण्डेय
हैदराबाद

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