भाई

भाई

दूर हो जाऊँ सबसे या ये छूट जग जाये,
एक बस साथ तेरा मुझको भाई मिल जाये।

बिन तेरे क्या करूँ मैं ले के जग के खजाने,
न भाये तेरे बिन मुझको ये सारे जमाने।
हो साथ तेरा अगर तो मरुथल भी खिल जाये,
एक बस तुम्हारा साथ मुझको भाई मिल जाये।

साथ जब तक है तेरा दुनिया की खुशियाँ सभी,
हर अँधेरे राह की रोशन रहीं गलियाँ सभी
ज्यूँ कड़कती ठंड में सुनहरी धूप खिल जाये,
एक बस तुम्हारा साथ मुझको भाई मिल जाये।

कामना कुछ भी नहीं है अब किसी आकाश की,
एक बस इच्छा यही है चाह तेरे पास की।
हाथ तेरा हाथ में जब बंद राह खुल जाये,
एक बस तुम्हारा साथ मुझको भाई मिल जाये।

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