चला जाऊँगा
न होगा तेरी पलकों को मेरा इंतजार चला जाऊँगा।
जब न रहेगा बीच हमारे कोई इकरार चला जाऊँगा।
एक भरोसे की डोर ही तो थी जिसने बाँध रखी थी हमें,
अब जो भरोसे में ही पड़ गयी है दरार चला जाऊँगा।
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
email-ajaykpandey197494@gmail.com
ग़ज़ल - आँखें भींग जाती हैं तुझे यादों में मिलता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तुझे मैं ख़त में लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरा चेहरा ही ब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें