डरते-डरते

डरते-डरते

दर्द न होता तो क्या करते,
या हम जीते या के मरते।
दूर यहाँ से हो न सके हम,
आये हैं फिर डरते-डरते।

चाहे खुशियाँ चाहे आँसू,
अपने हिस्से जो कुछ आया।
चाहे सदमे या फिर आहें,
हमने हँसकर सब अपनाया।

खुद को अलग हम कर न पाये,
पास न आते तो क्या करते।
दूर यहाँ से हो न सके हम,
आये हैं फिर डरते-डरते।

लाख जतन कर प्यार छुपाया,
भाव हृदय के रोक न पाये।
कितने पन्ने लिख कर फाड़े,
चाह के भी हम कह न पाये।

कहीं बचा कुछ बीच हमारे,
सोच रहे थे कैसे कहते।
दूर यहाँ से हो न सके हम,
आये हैं फिर डरते-डरते।

तड़प रही हैं सदियाँ कितनी,
लम्हों की फिर कौन सुनेगा।
फैला हो चँहुओर उजाला,
अँधियारा फिर कौन चुनेगा।

आस किरण की लिए "देव" फिर
सम्मुख आया डरते-डरते।
दूर यहाँ से हो न सके हम,
आये हैं फिर डरते-डरते।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
       27 जनवरी, 2024


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