गीत को सम्मान।

गीत को सम्मान।  

हो समर्पण प्रेम में जब तब मधुरतम गान बनता
तब हृदय में प्रेम पनपे गीत को सम्मान मिलता।।

नैन की जब पुण्य बूँदें इस हृदय की सींचती हैं
प्रेम में अभिभूत होकर जब अधर को भींचती हैं
साँस भी उन्मुक्त होकर जब कह पड़े दिल की लगी
और आहों में हृदय की जब भावनाएं हों जगीं
भावनाओं के समर में नेह को जब मान मिलता
तब हृदय में प्रेम पनपे गीत को सम्मान मिलता।।

बूँद पलकों से उतरकर जब कपोलें चूमती हैं
नैन से बिछड़ी मगर जब मस्त होकर झूमतीं हैं
जब बहे गीतों के संग आँसुओं की धार घुलकर
और कह दे भावनाओं से हृदय के तार मिलकर
जब नयन से गीत छलके आँसुओं को मान मिलता
तब हृदय में प्रेम पनपे गीत को सम्मान मिलता।।

लेखनी जब भी मचलकर गीत लिखती कागजों पर
चाँदनी मन की निखरती सुर सजाती बादलों पर
अर्चना के भाव में मन प्रेम को नव धाम देते
मौन गीतों को सफर में इक नया आयाम देते
पाषाण मन के भाव को जब नया भगवान मिलता
तब हृदय में प्रेम पनपे गीत को सम्मान मिलता।।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
         हैदराबाद
        19अप्रैल, 2023

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