कुछ नूतन कर जाओ।

कुछ नूतन कर जाओ।  

रीत पुरानी बहुत हुई नई रीत के पंथ बनाओ
युग नई दिशाएं पाये ऐसा कुछ नूतन कर जाओ।।

मिले प्रेरणा इस जग को पुण्य पंथ की ओर चरण हो
मुक्त हृदय, भाव प्रवण हो नव गीतों का आज वरण हो
जीवन के सब पंथ सजे काँटों में भी पुष्प खिलाओ
युग नई दिशाएं पाये ऐसा कुछ नूतन कर जाओ।।

बीता पीछे छूट गया आने वाला वक्त नया है
हर युग की नई कहानी पीछे बोलो कौन गया है
नई कहानी नए राग में इस जग को आज सुनाओ
युग नई दिशाएं पाये ऐसा कुछ नूतन कर जाओ।।

अज्ञानी का तर्क सर्वदा अंतस को दुख देता है
तर्क ज्ञान का मिले जहाँ पर भावों को सुख देता है
ज्ञान श्रेष्ठ संपत्ति जगत में अपने गीतों में गाओ
युग नई दिशाएं पाये ऐसा कुछ नूतन कर जाओ।।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        15मार्च, 2023

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