दिल में अभी मेरा बसेरा है।

दिल में अभी मेरा बसेरा है।  

चाँदनी रात थी लेकिन कहीं मन में अँधेरा था
थी जाने बात वो कैसी न जाने कैसा घेरा था

न जाने कैसी रंजिश थी मेरी दिन के उजालों से
थी भीतर रात वो गहरी मगर बाहर सवेरा था

थामा हाथ गैरों का जिन्होंने आज महफ़िल में
नहीं थकते थे वो कहते तेरा हर दर्द मेरा है

हुआ अनजान उनसे भी नहीं अब आस है कोई
नहीं थकते थे जो कहते मिरा दिल में बसेरा है

लिखता हूँ किताबों में मैं बस तेरी कहानी को
यकीं मुझको तिरे दिल में अभी मेरा बसेरा है

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        13दिसंबर, 2022

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