अधरों पर उपकार बहुत है।
जग से इतना कुछ पाया है अब तो ये अधिकार बहुत है
निज पीड़ा पर गीतों ने जो मलहम बनकर चैन दिया है
गीतों के उस महा पंक्ति का अधरों पर उपकार बहुत है।।
©✍️अजय कुमार पाण्डेय
हैदराबाद
13नवंबर, 2022
राष्ट्रनीति का वाहक, एक राष्ट्र श्रेष्ठ राष्ट्र का समर्थक, बेबाकी से दिल की बातों को कहता हूँ।
झुलसाया है इतना
वक्त के थपेड़ों ने
के नींद से उठकर के
अब जग गया हूँ।।
मेरी सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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लेखक परिचय अजय कुमार पाण्डेय 30 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जनपद में जन्मे अजय कुमार पाण्डेय वर्तमान में हैदराबाद (तेलंगाना) में...
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