आलिंगन में हमने जीवन भर लिये।

आलिंगन में हमने जीवन भर लिए।  

भावों की फुलवारी से चुन प्रेम की कुछ पाँखुरी
हमने आलिंगन में अपने आज जीवन भर लिया।।

कह दिये जो शब्द तुमने भाव मन का खिल गया
क्या कहूँ तुमसे यहाँ पर क्या क्या मुझको मिल गया
चुन लिये हैं प्रीत के पल भर लिये हैं आँजुरी
मुझको जीवन के भँवर में जैसे किनारा मिल गया।।

पास आती हर लहर से भर के मन की गागरी
हमने आलिंगन में अपने आज जीवन भर लिया।।

कह दिया कुछ आज मन की और मन की सुन लिया
राहों में जो पुष्प बिखरे हमने उनको चुन लिया
रच लिये नव गीत हमने छू के तेरी आँगुरी
मन के विचलन को यहाँ जैसे सहारा मिल गया।।

मिल गया मन आज ऐसे खत्म मन की आतुरी
हमने आलिंगन में अपने आज जीवन भर लिया।।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        27जनवरी, 2022

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