खामोशी से कहना है।

खामोशी से कहना है।  

सीने में तूफान हजारों
आँखों में क्यूँ सूनापन है
खामोशी के कोने में भी
कहीं छुपा वो अपनापन है।
माना इक खामोशी पसरी
पर मुश्किल अब चुप रहना है
जो भी भाव हृदय में जागे
हाँ, खामोशी से कहना है।।

मासूम निगाहों ने देखो
पलक झुका कर सब कह डाला
अधरों ने भी कंपन कर के
बिना कहे सब कुछ कह डाला।
नैनों ने जब बातें कह ली
फिर अधरों से क्या कहना है
जो भी भाव हृदय में जागे
हाँ, खामोशी से कहना है।।

साँसों की सरगम गा गाकर
करती कितने मधुर इशारे
स्वप्नों को भी पंख लगे हैं
आशाएँ भी राह निहारे।
आशाओं ने पंथ बुहारा
मौन नहीं अब रहना है
जो भी भाव हृदय में जागे
हाँ,  खामोशी से कहना है।।

©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        07अगस्त, 2021

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