करवट।



करवट।  

हैं बड़ी नादान रातें ये सितारे भी समझते हैं
मगर आगोश में आयें नजारे भी तरसते हैं।।

किसी का साथ जब होता है मौसम भी हसीं लगता
बिछड़ कर आसमानों से कहाँ बादल बरसते हैं?

गुजर जाते हैं ये लम्हे भी यादों के झरोखों से
अकेले  हो गये जब भी बड़ी मुश्किल गुजरते हैं।

कहें किससे ये बातें औ सुनाएँ दास्ताँ किसको
अकेली  रात जब भी है तो बस करवट बदलते हैं।।

 ©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        03जून, 2021

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