साथ तुम्हारा।

साथ तुम्हारा।  

मौसम के अनुमानों ने
इस दिल के अरमानों ने
मुझमें कितने रंग भरे हैं
जो साथ चलो तो कह दूं मैं।।

तुमसे मैं तो मिला अभी ही
और अभी ही देखा है
तुमसे मिलकर लगा मुझे यूँ
तुझमें जीवन रेखा है।
मेरे जीवन में तुम क्या हो
जो साथ चलो तो कह दूँ मैं।।

पल भर के इस नेह मिलन ने
स्वप्न अनेकों बुन डाले
और तुम्हारे अपनेपन ने
गीत अनेकों रच डाले।
गीतों ने क्या कुछ रच डाला
जो साथ चलो तो कह दूँ मैं।।

कहने को हैं कितनी बातें
नई पुरानी कितनी घातें
दिल ने कितना दरद सहा है
पलकें जागी कितनी रातें।
इस पल में तुमसे क्या पाया
जो साथ चलो तो कह दूँ मैं।।

©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
       हैदराबाद
       26मार्च, 2021
जो साथ तुम्ह
उम्मीदों के फूल खिले तो








कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लेखक परिचय

लेखक परिचय अजय कुमार पाण्डेय 30 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जनपद में जन्मे अजय कुमार पाण्डेय वर्तमान में हैदराबाद (तेलंगाना) में...