अभी शुरुआत है

   ये अभी शुरुआत है      


हौसला रख ऐ ज़िंदगी
ये अभी शुरुआत है
किसको कब कब क्या मिला
ये मुकद्दर की बात है।।

साथ चल तू वक्त के
हौसलों की थाम कर
आएगी मंज़िल नज़र
बस तू यूँ ही प्रयास कर।।

लोग ताने दें तुझे
या फिर करें कटाक्ष कहीं
तेरी है ये जिंदगी
बस इतना तू खयाल रख।।

तू जो राहों पर चला
तो न बाधाओं का विचार कर
जो भी बाधाएं मिलें
उनकी अंगीकार कर।।

रिश्तों की उलझन यहां
अपनों का सम्मान भी
चाहे जैसी भी घड़ी हो
खुद पे तू विश्वास कर।।

शब्दों की हो वेदना 
या झूठ का प्रहार हो
ज़िंदगी का गीत है ये
बस तू यही आभास कर।।

अर्थ मेरे हैं कई
और कई विस्तार भी
जिसने जैसा पढ़ लिया
वैसी ही इक किताब हूँ।।

हौसला रख ऐ ज़िंदगी
ये अभी शुरुआत है।।

अजय कुमार पाण्डेय




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