दोहा

दोहा

श्रद्धा जाके मन बसे, हृदय बसे हनुमान।
निश्चय विजय प्रतीत हो, बढ़े बुद्धि अरु ज्ञान।

जोरि-जोरि धन मन मुआ, मिला न मन को चैन।
चिंता मन को सालती, कैसे बीते रैन।।

मन में है संतोष यदि, और प्रेम का भाव।
जीवन ये फूले-फले, मिलती प्रभु की छाँव।।

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