मन के पट खोल।

मन के पट खोल। 

मन के पट तू खोल रे
मीठे मीठे बोल रे
कुछ भी कहने से पहले
शब्दों को तू तोल रे।

शब्दों से एहसास जगे हैं
रिश्तों में मिठास जगे हैं
बिगड़ी सब बातें बन जाती
अपनेपन की प्यास जगे हैं।

क्या तेरा है क्या है मेरा
ये दुनिया इक रैनबसेरा
काहे को अभिमान करे
ये जग जोगी वाला फेरा।

इक दिन सबको है जाना
क्या खोना, औ क्या पाना
राहों में जो भी मिल जाये
हँस करके सबको अपनाना।

हाथ तेरे न कुछ आएगा
जो भी पाया रह जायेगा
खुलेगी जब कर्मों की गठरी
सत्कर्म तेरा बस काम आएगा।

ऋषि महात्माओं की है वाणी
जीवन है ये अनमोल रे
नैतिकता की राह चला चल
भक्ति में जीवन घोल रे।

मन के पट तू खोल रे
मीठे मीठे बोल रे
कुछ भी कहने से पहले
शब्दों को तू तोल रे।

 ✍️©️अजय कुमार पाण्डेय
         हैदराबाद
         01सितंबर,2020

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