छत

                 छत                    

           

हर किसी को तलाश है
एक छत की,
हर किसी को आस है
एक छत की,
छत जो सहारा दे
आंधी से, तूफान से, बरसात से
इंसान जन्म लेता है
छत के नीचे
खत्म होता है - जीवन
छत के नीचे
फिर भी तलाश है
एक छत की

अजय कुमार पाण्डेय


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ख़याल करता हूँ

ख़याल करता हूँ वतन को बाँटने वालों से सवाल करता हूँ, मैं आज भी उसी भारत का ख़याल करता हूँ। जो सच की बात करे उसकी आवाज़ दबती है, मैं ऐसे हर सि...