झूठ क्यूँ महान है
एकलव्य फिर खड़ा हाथ में प्रमाण ले,
आँख में स्वप्न और दिल में अरमान ले।
जल रही यहाँ चिता मौन आसमान है,
श्वेत सूत में सना झूठ अब महान है।
योग्यता कल भी शीर्ष की गुलाम थी,
योग्यता आज भी शीर्ष की गुलाम है।
सत्ता के प्रभाव में राष्ट्रवाद मौन है,
सत्य के स्वभाव को पूजता कौन है।
धर्म की अफीम से सोया वर्तमान है,
सत्ता के लोभ की योग्यता गुलाम है।
तोड़नी थी बेड़ियाँ झूठ की क्षोभ की,
सामने खड़ी मगर सत्ता की लोभ थी।
था वचन बद्ध वो सत्ता के प्रभाव में,
सत्ता मोह पर उसके था स्वभाव में।
धर्म की आड़ छुपी धूर्तता भारी थी,
व्यूह इस तरह रचा योग्यता हारी थी।
सत्ता का मोह था अंधी थी कामना,
योग्य को खा रही अंधी एक वासना।
धर्म छिन्न-भिन्न था चीर-चीर गिर रही,
स्वार्थ की आंधी में नीतियाँ मर रही।
भूत का सबक मगर वर्तमान जान ले,
योग्यता ना दबेगी सत्य ये मान ले।
भविष्य जो मौन है काल का प्रभाव है,
सत्य से हारना असत्य का स्वभाव है।
©️✍️अजय कुमार पाण्डेय
हैदराबाद
12 फरवरी, 2026
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