ज़िंदा हो अगर जग में तो दिखना भी जरूरी है

आँखें दी अगर प्रभु ने तो खुलना भी जरूरी है।
जिह्वा दी अगर प्रभु ने तो कहना भी जरूरी है। 
रहे जो मौन मुश्किल में किसी को दोष मत देना, 
ज़िंदा हो अगर जग में तो दिखना भी जरूरी है।

कि लम्हों ने जो बोया है सदियों ने ही काटा है।
कभी शासन कभी सत्ता कभी लालच ने बाँटा है।
हुए यदि एक ना लम्हे तो सदियाँ भूल जायेंगी,
लड़े लम्हे जो आपस में सदियों को ही घाटा है।





कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ग़ज़ल

ग़ज़ल दिल में जो राज़ है, दुनिया को बताएँ कैसे दर्द आँखों का भला सबसे छुपाएँ कैसे टूट जाएँ जो कभी ख़्वाब तो फिर क्या कीजे अपने अरमानों को हम...